क्या आप अपनी दशा (या दुर्दशा) पर खुल कर हंसते हैं ?
ब्लाग जगत में हास्य की याद आते ही भाई बृजमोहन श्रीवास्तव की एक रचना याद आजाती है जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी ...( या भगवान जाने किसके लिए ....?) के लिए लिखा था ! "इस पर प्रिये तुम हो , गम हैं , उस पार तो कुछ अच्छा होगा " बेचारे पति की यह बेबसी और फिर...
[पूरी पोस्ट]
सतीश सक्सेना
18
1
0
1
4
[22 Jun 2009 03:12 AM]



Shuffle








