ठेले पर डेटोनेटर

मन उवाच..... दसवीं क्लास में पढ़ा था। ठेले पर हिमालय। धर्मवीर भारती ने बड़े ही रोचक ढंग से शुरूआत की थी। शीर्षक पढ़कर लगा था कि कि हंसते-हंसते पेट में बल पड़ जाएंगे, लेकिन उम्मीदों से अलग हिमालय की बर्फ में शांति की खोज लिए लेखक कौसानी जा पहुंचा। पहले पैराग्राफ न... [पूरी पोस्ट]
writer मधुकर राजपूत
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[22 Jun 2009 02:48 AM]

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