~ माथा भूमि पर धरा... पर माथा धरा ना कबहूँ.. ~ (जयंत)

Jayant Chaudhary मन में राखे अंहकार , क्या पायेगा उस पार , जीव अकेला ही चले , पीछे रह जाए संसार ॥ सत् असत का रहत है , मन में सदा संघर्ष , सत् पर जोर लगाय ले , जो पाना हो उत्कर्ष ॥ मूरत आगे तू रहत, मन मूरत ज्यों नाहीं, क्षण क्षण चौकड़ी भरे, ज्यों मृग वन माहीं॥ माथा भूम... [पूरी पोस्ट]
writer Jayant Chaudhary
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[22 Jun 2009 01:28 AM]

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