हिंदी-राष्ट्र की धड़कन-राष्ट्र की सोच.
भारत देश में आम बोलचाल की भाषा, फिल्मों तथा दूरदर्शन के निजी चैनलों पर चटखती-मटकती हिंदी, राष्ट्र की धड़कनों को बखूबी बयॉ कर रही है परन्तु यह हिंदी राष्ट्र की सोच को अभिव्यक्ति नहीं कर पा रही है। इसके परिणामस्वरूप राष्ट्र की धड़कनों और राष्ट्र की सोच...
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धीरेन्द्र सिंह
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[22 Jun 2009 00:05 AM]



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