पिताजी - एक श्रद्धांजलि

HINDI KAVYA MANCH अपनो के विछोह से |बंधे जिनके मोह से |उनके अवसान से |जीव के प्रयाण से |दुख की गहराई है |याद बहुत आई है |जितना मैं भुलाता हूँ |भूल नहीं पाता हूँ |मुझ पे उनका साया था |हाथों से मुझे खिलाया था |धूप में कुम्हलाता हूँ |कुछ सोच नहीं पाता हूँ |कैसे अब जी पाऊ... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मानोरिया
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[21 Jun 2009 06:36 AM]

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