खदबदाहट के बीच जैसे पकना

आवारा बंजारा भीतर की खदबदाहट जैसे उकसाती है………वही खदबदाहट जो चूल्हे पर चढ़े भात के बर्तन में होती है………………पर जब इसमें उफान आता है तो फिर क्या होता है………कारण मालूम नहीं इस खदबदाहट का……लेकिन इक बेचैनी सी तारी रहती है……… हावी नहीं होता खुमार किसी चीज का……………लेकिन भरी... [पूरी पोस्ट]
writer Sanjeet Tripathi

कुछ अपनी

views
29
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
10
[21 Jun 2009 03:26 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix