उस ख़त को पढ़ लेने के बाद ----
जेठ की दोपहरी में आँचल को लहराकर एक छत लिखा है मिल गया आज मेरे नाम तुमने जो ख़त लिखा है एहसासों के मुँह पर उंगली रख बोलने से मना कर दिया मैंने उस ख़त को डायरी में रख खोलने से मना कर दिया मैंने मुझे पता है, उस लिफाफे में महज़ एक कोरा कागज़ ही होगा अल्...
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M VERMA
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[20 Jun 2009 23:02 PM]



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