और शायद मैं फौरी नतीज़ों से खौफ़ज़दा हूं

सृजन और सरोकार मेरे पास कई ख़्वाब हैं (a poem by ravi kumar, rawatbhata) मेरे पास कई ख़्वाब हैं ख़्वाबों के पास कई ताबीरें पर लानतें भेजने वाली बात यह है मुझे मेरे ख़्वाबों की ताबीर नहीं मालूम मैंने उसे अपने ख़्वाब बताए और ताबीर जाननी चाही वह फ़िक्रज़दा हो गई और मकडियों क... [पूरी पोस्ट]
writer रवि कुमार, रावतभाटा
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[20 Jun 2009 11:20 AM]

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