ण
ण कहता है, प्यारे बच्चों, मैं अपनी बात बताता हूँ, अपना प्रयोग अब घटता देख, मैं बहुत सकुचाता हूँ। पर मुझे बहुत खुशी होती, शब्दों के बीच में आकर, अपने मित्र-संबंधियों का, थोड़ा संसर्ग भी पाकर। वाण, रण जैसे शब्द, जो संस्कृत में आए हैं, बिना किसी बदलाव क...
[पूरी पोस्ट]
प्रभाकर पाण्डेय
23
1
0
1
2
[20 Jun 2009 08:44 AM]



Shuffle








