ननिहाल ण कहता है, प्यारे बच्चों, मैं अपनी बात बताता हूँ, अपना प्रयोग अब घटता देख, मैं बहुत सकुचाता हूँ। पर मुझे बहुत खुशी होती, शब्दों के बीच में आकर, अपने मित्र-संबंधियों का, थोड़ा संसर्ग भी पाकर। वाण, रण जैसे शब्द, जो संस्कृत में आए हैं, बिना किसी बदलाव क... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभाकर पाण्डेय
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[20 Jun 2009 08:44 AM]

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