कायांतरण
क़स्बे के व्यक्तित्व में तेज़ी से परिवर्तन हो रहा था। रात में मुस्कुराते तारे निर्जीव होकर टंगे लगते थे। सबने जैसे सामूहिक रूप से फांसी खा ली थी। आसमान की प्रांजलता समाप्त हो गई थी। एक पीपल का पेड़ जो क़स्बे में सबसे बूढा था अब सूखने लग गया था। ये उस...
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sanjay vyas
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[20 Jun 2009 05:43 AM]



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