आसमां के आगे एक जहाँ हो तो
कल्पना ... इंसान के जीवन का अविभाज्य अंग .... कोई माने या न माने ... कल्पना करते तो सभी हैं जिसकी उड़ान की कोई सीमा ही नहीं होती। भले ही ये ज़मीनी हकीकत से दूर हो और कुछ लोगो की जिन्दगी में पानी के बुलबुलों से ज्यादा कोई मायने न हो इनके ... पर कुछ के...
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Priya
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[20 Jun 2009 00:24 AM]



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