कीमियागर - एक रसायनज्ञ (भाग - २, किश्त - ३५)
ये सही कहा तुमने", उस कीमियागर ने जवाब दिया। "ये वाकई डरा हुआ है कि कहीं अपने स्वप्न कि खोज मैं तुम वो सब न खो बैठो जो तुमने अब तक कमाया है। " "तब मुझे इसकी बात क्यों सुननी चाहिए?" "क्योंकि तुम इसे कभी शांत न रख पाओगे। अगर तुम इसको न सुनने का दिखावा...
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Rahul Singh
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[19 Jun 2009 19:28 PM]



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