गजल-- वो हमें खामोशियों से उम्र भर छलते रहे --वीनस केसरी

आते हुए लोग ११ मई को पोस्ट की गई गजल हम बहारे जिन्दगी की आरजू लिखते रहे के तीन और शेर पुरानी डायरी में मिले गुरु जी श्री पंकज सुबीर जी से इस्लाह कराके आपकी नज़र कर रहा हूँ देखिये कैसे बन पड़े है .... हम बहारे जिन्दगी की आरजू लिखते रहे कुछ पुराने घाव थे जो उम्र भर... [पूरी पोस्ट]
writer venus kesari
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[19 Jun 2009 14:12 PM]

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