टूट कर बिखरा, तारा था कोई...

उदास आँखों का ख्वाब टूट कर बिखरा, तारा था कोई दिल भी मेरा बंजारा था कोई सहरा-सहरा, दरिया-दरिया भटका बहुत, आवारा था कोई तमाम उम्र तन्हाईओं के तले रहा कितना बेआसरा-बेसहारा था कोई ज़िक्र भूले से मेरा जो आ गया इतना कहा- 'बेचारा था कोई' उनको हमसे कोई वास्ता ही नहीं कैसे कहें... [पूरी पोस्ट]
writer क्षितीश
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[19 Jun 2009 12:51 PM]

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