तुमने आँखों ही आँखों में .....
तुमने आँखों ही आँखों में क्या संकेत दिया अनजाने मेरे आँगन में खुशियों ने पावन बन्दनवार सजाया तुमने बातों ही बातों में क्या बातें की थीं अनजाने मेरे भावों ने भाषा का परिणय स्वर के साथ रचाया हर मौसम मधुमास बन गया हर पक्षी कोकिल सा बोले मुझको लगता इस धर...
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Deepa Pant
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[19 Jun 2009 12:22 PM]



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