हस्यिका :अथ श्री चमचा पुराण : कुछ दोहे

गीत  ग़ज़ल  औ गीतिका राजनीति चमचागिरी यही सार यही तत्व जितने चमचे साथ हों उतना अधिक महत्त्व मनसा वाचा कर्मणा ना होगा जो भक्त वह चमचा रह जाएगा आजीवन अभिशप्त नेता से पहले मिले चमचा जी से आप 'सूटकेस' का वज़न देख कारज लेते भांप चमचों के दो वर्ग हैं 'घर-घूसर' और 'भक्त ' घर-घूस... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[19 Jun 2009 11:23 AM]

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