आम आदमी और महंगाई दर
कैसी विडंबना है। महंगाई दर बढ़े तो मुश्किल। घटे तो मुश्किल। सब परेशान हैं। सबसे ज्यादा परेशान है, आम आदमी जिसे महंगाई दर का क ख ग तक नहीं मालूम। लेकिन परेशान है। अखबार हाथ में थामे महंगाई दर पर खबर पढ़ता रहता है। जैसा अखबार लिख देता है, उसी हिसाब से...
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अंशुमाली रस्तोगी
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[19 Jun 2009 02:55 AM]



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