इश्क़ की बातें

फुरसत के रातदिन ना जाने कितनी हो चुकी हैं जोश की बातें अब इश्क़ में कुछ चाहिए भी होश की बातें हमको बदलना इश्क़ में सब ठीक ठाक है उनपे जो आई बात तो गुलपोश की बातें महफ़िल में अजनबी की तरह आप जो मिले आती हैं बहुत याद वो आगोश की बातें वालिद हैं आपके की नुकता ची के हैं... [पूरी पोस्ट]
writer अभिषेक'शफक़'
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[19 Jun 2009 02:37 AM]

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