तू मुझको टिपिया सनम, मैं तुझको टिपियाउं
इन दिनों हमारे ब्लाग जगत में एक अजीब सी परंपरा चल रही है । ये परंपरा है महान बनाने की परंपरा । अ की टिप्पणी ब को मिलती है कि आप महान हैं तो जवाब में ब की भी नैतिक जिम्मेदारी होती है कि वो भी अ को ऐसी ही टिप्पणी दे । सब एक दूसरे को महान बनाने में...
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पंकज सुबीर
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[19 Jun 2009 01:32 AM]



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