वो राग रागिनी सी चंचल
वो राग रागिनी सी चंचल झंकृत मन को कर देती बाला कहाँ सुरा तीव्र है मदमय तनमन जीवन देती स्वप्न लगे कभी सत्य लगे जो क्षण क्षण सरगम बजती सुरमय तपते थरथर अधरों पर जब पावस वीणा सजती शांत सरोवरों की हलचल बन किसी किनारे चल देती वो राग रागिनी सी चंचल झंकृत मन...
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abhivyakti
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[18 Jun 2009 16:05 PM]



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