ऐ जाने वफ़ा ये जुल्म न कर...

क़ासिद तो भैया, अब ये भरम भी जाता रहा कि आदमी अपने काम से जाना जाता है। अब मिसल ये दी जाती है कि दुनिया में रहना है तो आराम करो प्यारे, हाथ जोड़ सबको सलाम करो प्यारे। और दिक्कत ये है ससुरी कि हमने अच्छी अच्छी चीज़ें लगता है कुछ ज्यादा ही पढ़ ली हैं। स्कूल म... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज शुक्ल
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[18 Jun 2009 14:33 PM]

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