ओ.. गौरेया... ओ.. गौरेया...
ओ.. गौरेया... ओ.. गौरेया... पीपल पे रहने आयीं तुम.... मेरे मन को भाई तुम.... ओ.. गौरेया... ओ.. गौरेया... सांझ ढले तुम आती, माँ सुनाये ज्यों लोरी, तुम भी ममत्व गीत हो गाती, आँगन के पीपल का कोटर, तुमने आन सजाया है, क्षण-क्षण विहंस कलाव कर, हर दिन तुमने...
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मीत
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[18 Jun 2009 07:20 AM]



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