कुछ व्यंग्य कवितायें
ं जब एक हट्टे कट्टे भिखारी ने मांगा आटा तो अपनी कड़की छुपाने के बहाने मैंने उसे बुरी तरह डांटा पहले तो उसने सहा फिर उत्तर में कहा आपकी इस दशा पै हँसूं या रोऊं आप तो ऐसे डंाट रहे हैं जैसे में आटा नहीं वोट मांग रहा होऊं ं घोड़े और घास का कैसा अद्भुत सामं...
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वीरेन्द्र जैन
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[18 Jun 2009 07:11 AM]



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