ऐसा क्यूँ है?...

कुछ लम्हे दिल से... जावां तमन्नाओं की रौ में दिल गमगीन क्यूँ है वक़्त है उमंगों का फिर भी काया में थकान क्यूँ है जज्बातों को ना समझ सके उन अपनों की आकांक्षाओं का फ़रमान क्यूँ है भरी महफ़िल में हो फिर भी अपनों में भी इंसान अकेला सा क्यूँ है जिंदादिली की ना पूछो दोस्तों ज... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी
views
18
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
7
[18 Jun 2009 04:15 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix