प्यार के रिश्ते बने बनाए नहीं मिलते
तू सुगंध है सुगन्ध किसी की मल्कियत नहीं हुआ करती तू मेरी मल्कियत नहीं सुगंध एहसास के लिए हैं बाजुओं में उसकी कल्पना धोखा है अपने आप से धोखे में जीना खुद को कत्ल करना है मैंने खुद को कत्ल किया है मैंने हर पल जहर पीया है हर सोच में तू मेरी है सिर्फ मेर...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[18 Jun 2009 03:08 AM]



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