घर में कोई मेहमा आने वाला है....

अंकित सलाम दोस्तों, फ़िर से आपके सामने हूँ एक नई ग़ज़ल के साथ जो गुरु जी (पंकज सुबीर जी) के आर्शीवाद से इस रूप में आई है। चीज़ मुहब्‍बत है जादू की इक चाबी। लहजा बदला, बातें भी बदली बदली। उनसे मिलना सालों बाद करे पागल, खत को खोल टटोल रहा बातें पिछली। हाथ पकड़ ज... [पूरी पोस्ट]
writer अंकित "सफ़र"
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[18 Jun 2009 02:46 AM]

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