चिडि़या पानी तो पी ले, लेकिन दूब न खाए

दिमाग की हलचल प्रकृति की नेमतें मुझे और भी हीनता का अनुभव कराती है जब मैं सोचता हूं कि मेरे घर के बगीचे में रखे पाळसिए यानि मिट्टी के बर्तन में रखे पानी को पीने के लिए चिडि़याएं आएं और पानी पीएं। इससे मेरे घर में चिडि़यों का संगीत गूंजता रहेगा। लेकिन इसके साथ ही म... [पूरी पोस्ट]
writer सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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[18 Jun 2009 01:33 AM]

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