* जीवन को तू बना बहार * (~जयंत)
मन के जीते जीत है , और मन के हारे हार, मन चाहे तो पतझड़ भी, बन जाए बसंत बहार ... सुख दुःख का तो लगा रहेगा , जीवन में मेला बारंबार , अश्रु बहा के व्यर्थ ना करना , तू अद्भुत जीवन - उपहार ... जैसा मन चाहे तू जी ले , मन को तू कभी मत मार , जीवन का अनुपम अ...
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Jayant Chaudhary
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[17 Jun 2009 23:53 PM]



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