रख सको तो एक निशानी हूं मैं...

संवेदना जून 09 अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं... सबको प्यार देने की आदत है हमें अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे कितना भी गहरा जख्म दे कोई उतना ही ज्यादा मुस्कर... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कुमार वर्मा
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[17 Jun 2009 14:26 PM]

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