मुझे ‘चोर’ कहने का शुक्रिया
दो-चार दिन पहले की ही बात है । अपने ब्लाग पर आयी टिप्पणियां देख रहा था । चिरकुटों के चंगुल में हिन्दी शीर्षक से लिखी गई लेखमाला की तीसरी और अंतिम कड़ी पर आई दो टिप्पणियां कुछ ‘अलग’ सी दिखीं । अलग सी इसलिए कह रहा हूं कि अच्छा-बुरा, सही-गलत कहना मेरे लि...
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kaustubh
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[17 Jun 2009 08:40 AM]



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