घर के बुद्धू लौट के घर को आजा

सस्ता शेर बहुत दिनों से इस गली में आना ही नहीं हुआ । आज बहुत दिनों बाद आया हूं और एक कुंडलिनी टाइप की रचना पेल रहा हूं । कुडलिनी की विशेषता ये होती है कि जिस शब्‍द से शुरू होती है उसी पर समाप्‍त होती है । माही जी की ना गली टी ट्वन्‍टी में दाल फिर भी हैं बेशर्म... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज सुबीर
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[16 Jun 2009 22:59 PM]

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