एक पल ही जियो ...

मा पलायनम ! एक पल ही जियो , फूल बन कर जियो , शूल बन कर ठहरना नहीं जिन्दगी || अर्चना की सजोये हुए अंजली , तुम किसी देवता से मिलो तो सही | जिन्दगी की यहाँ अनगिनत डालियाँ , तुम किसी पर सुमन बन खिलो तो सही || एक पल ही जियो , तुम सुरभि बन जियो , धूल बन कर उमड़ना नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. मनोज मिश्र
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[16 Jun 2009 21:47 PM]

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