अब सब फसाना है

POEM OF SOUL दोपहर की धूप से बचने मेरे कमरे मे आना वो तेरा एक बहाना था। पास तुम तो थी वरना सब अफसाना था। तेरी जुल्फों की छांव में तेरी गोद में सर रखना वो तेरा एक बहाना था। पास तुम तो थी वरना सब अफसाना था। मेरे बालों को सहलाना साथ मेरे हमेशा रहना वो तेरा एक बहाना... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj
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[16 Jun 2009 21:12 PM]

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