मुरली तेरा मुरलीधर 6

अखिलं मधुरम् सोच अरे बावरे कर्म से ही तो बना जगत मधुकर चल उसके संग रच एकाकी एक प्रीति पंकिल निर्झर प्राण कदंब छाँव में कोमल भाव सुमन की सेज बिछा टेर रहा सुखसृष्टिविधाना मुरली तेरा मुरलीधर।।41।। रख निश्शब्द स्नेह से उसके आनन पर आनन मधुकर भर ले रिक्त हृदय की गागर उ... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu
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[16 Jun 2009 21:10 PM]

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