रमाकांत-सूर्यकांत
एक सुबह दिल्ली आने के लिए कप्तानगंज से बस पकड़ते हुए दोनों एक साथ ही मिल गए। बस सेकंड भर का खुटका, और लगा कि अभी कल ही शाम बस्ता कंधे पर टांगे स्कूल से घर जाने के लिए अलग हुए हों। रमाकांत उपाध्याय और सूर्यकांत राय। माट्साब लोग इन्हें दो बैलों की जोड़...
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चंद्रभूषण
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[16 Jun 2009 10:22 AM]



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