सभ्यता का आदि देश

मेरी कलम से विद्यार्थी जीवन में एक प्रसिद्घ जासूसी कहानी पढ़ी थी। यदि एक बात को आधार मानकर चला जाय तो एक निष्कर्ष पर पहुँचते हैं, जो निश्चित दिशा को इंगित करता है। पर यदि क्षण भर दूसरा आधार, जो उतना ही सुसंगत है, मानें तो सारा दृश्य उलट जाता है और सभी संकेत एवं... [पूरी पोस्ट]
writer Krishna Virendra Trust: कृष्णा वीरेन्द्र न्यास
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[16 Jun 2009 09:01 AM]

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