गाड़िया लुहारिन का प्रेम गीत

Beyond The Second Sex (स्त्रीविमर्श) एकालाप गाड़िया लुहारिन का प्रेम गीत पिता ने संडासी जैसे दृढ़ हाथों से बड़ी संडासी में पकड़ रखा है तपता हुआ लौहखंड जकड़कर . माँ धौंक रही हवा से फुलाकर धौंकनी लगातार. भट्टी तप रही . दुपहरी भी तप रही . तप रहे हम दोनों. मैं और तुम आमने - सामने , तुम्हारे... [पूरी पोस्ट]
writer कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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[14 Jun 2009 17:45 PM]

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