सांभर वड़े और थोड़ा-सा प्यार

मन की परतें पेइंग गेस्ट हाउस में शिफ्ट हुए अभी एक महीना ही हुआ है। अंकल-आंटी की कृपा से बढ़िया खाना तो नसीब हो ही रहा है, लेकिन साथ रहने वाले कुछ जवानों की बातों से दिल भी बाग-बाग रहने लगा है। टेलीफोनिक प्रेमी तो सुबह जगने से लेकर रात को सोने तक नजर आते ही हैं, ल... [पूरी पोस्ट]
writer Dileepraaj Nagpal
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[14 Jun 2009 12:33 PM]

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