फरीद के श्लोक - ३६
फरीदा दुनी वजाई वजदी तूं भी वजरि नालि॥सोई जीउ न वजदा जिसु अलरु करदा सार॥११०॥फरीदा दिल रता इसु दुनी सिउ दुनी न कितै कंमि॥मिसल फकीरां गाखड़ी सु पाईऐ पुर करंमि॥१११॥पहले पहरै फुलड़ा, फलु भी पछा राति॥जो जागंनि,लहंनि से,साई कंने दाति॥११२॥दाती साहिब संदीआ,किआ...
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परमजीत बाली
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[14 Jun 2009 04:01 AM]



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