विस्मृत बिस्मिल और ब्लागर च तनवीर
पहले तो यह बता दूँ कि, यह पोस्ट भँग की तरँग में नहीं लिखी जा रही है । मानता हूँ कि शीर्षक बड़ा अटपटा बन पड़ा है, बल्कि यदि मुझे स्वयँ ही टिप्पणी देनी होती, तो उसे फ़कत एक लाईन में समॆट देता, " तेली के सिर पर कोल्हू ! " पर इस शीर्षक के पीछे एक...
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डा. अमर कुमार
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[13 Jun 2009 18:11 PM]



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