गोधूलि

I'm Vikash & this is my world...! गोधूलि में, जब कभी यह एकाकी मन - नीड़ों की ओर लौटते पंछियों के उल्लास में भी, देखता है थकन. जब शाम का सूरज बूढ़ा नजर आता है और पवन के झोंकों से मन, बोझिल सा हो जाता है. बाहर होता है कुछ और, और अंदर? अंदर कुछ और ही सूरत होती है, ठीक उसी अंधियारे में मुझ... [पूरी पोस्ट]
writer विकास कुमार
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[13 Jun 2009 16:51 PM]

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