लाला और लालाइन साथ में नहाये हैं.

डॉ.सुभाष भदौरिया.अहमदाबाद. ग़ज़ल लोग अपना संडे भी इस तरह मनाये हैं. लाला और लालाइन साथ में नहाये हैं. अपनी सविता भाभी भी, क्या ग़ज़ब की भाभी हैं, प्रेम का सिलेबस वो मुफ़्त में पढ़ाये हैं. उनकी वे पड़ोसिन भी, कितनी दरिया दिल देखो, इमरजंसी में अक्सर काम, काम उनके आये हैं. प्यार... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.सुभाष भदौरिया.
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[13 Jun 2009 15:27 PM]

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