कलाकार की व्यक्तिगत ईमानदारी - 1

मुक्तिबोध मेरी डायरी पर बहुत कम बहस हुआ करती है। लेकिन कल हो ही गयी। वो जो यशराज हैं न। वही, वही ! उस गली में रहते हैं। नहीं, नहीं, उनकी वकालत नहीं चलती। हाँ यूँ ही हैं, यों आदमी काबिल हैं। बी. एस-सी., बी.टेक.,एल-एल.बी., लेकिन बिलकुल बेरोजगार हैं। उस शहर में उ... [पूरी पोस्ट]
writer रंगनाथ सिंह
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[13 Jun 2009 12:07 PM]

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