ज़मीन को कसकर पकड़े रहना ! ! !
दरख्त ! तुम छू लोगे आसमान की बुलंदियां एक दिन बस, ज़मीन को कसकर पकड़े रहना. आंधियां आयेंगी आने दो, थोड़ा झुककर इन्हे गुज़र जाने दो तुम धूप की तपिश में निखर जाओगे, नई कोंपले फिर पनपेंगी रिमझिम फुहार जब पाओगे, तुम्हारी छांव में मुसाफिर फिर सुस्तायेंगे अप...
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M VERMA
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[13 Jun 2009 06:59 AM]



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