तेरी आर्ज़ू,तेरी जुस्तजू,तेरी बेरुखी, तेरी बेदिली.

डॉ.सुभाष भदौरिया.अहमदाबाद. ग़जल तेरी आर्ज़ू, तेरी जुस्तजू, तेरी बेरुखी, तेरी बेदिली. मेरी बेकसी, मेरी मुफ़लिसी, मेरी दिल लगी, मेरी तशनगी. तूने पा लिया, मैंने खो दिया, तू तो बस गयी, मैं उजड़ गया, मेरे सीने में, उठे हूक सी, तुझे क्या पता, है ये मनचली. तुझे ये गिला, कि भुला दिया,... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.सुभाष भदौरिया.
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[13 Jun 2009 03:07 AM]

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