मोहब्बत जुर्म नहीं अगर की जाए उसूल से

सस्ता शेर मोहब्बत जुर्म नहीं अगर की जाए उसूल से ख़ुदा को भी तो मोहब्बत थी अपने रसूल से लेकिन अबकी बार ईद पर हमारे सितारे हमारी हड्डियां तुड़वा गए हम चाँद के नजारे में खोए थे और चाँद के अब्बू वहीं पर आ गए. (कहीं से उड़ाया है, जाओ नहीं बताते)... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी
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[13 Jun 2009 02:40 AM]

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