अस्मत लुटना आम बात है ---
सर के ऊपर घर नहीं है आतताईयों को अब कोई डर नहीं है चलती ट्रेन में अस्मत का लुटना आम बात है खबर नहीं है चीखने- चिल्लाने का कोई भी असर नहीं है रंजो-गम से परे हो जाओ सुनो मत बहरे हो जाओ आँख को देखने मत दो पैर को चलने मत दो अँधेरा बेशक हो दीया कोई जलने म...
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M VERMA
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[12 Jun 2009 10:13 AM]



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