27 जून को पापा की बरसी
बड़ी मुश्किल होती है, जब किसी बेइंतहा क़रीबी के बारे में लिखना पड़े। कुछ यही हाल मेरा है। पुष्कर पुष्प जी ने एस. पी. सिंह यानी पापा के बारे में मुझे कुछ लिखने को कहा। मैं बिलकुल वैसा ही काम रहा हूं , जैसा कि किसी आंधी तूफान में बरगद का बड़ा पेड़ उखड़...
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Chandan Pratap Singh
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[12 Jun 2009 09:09 AM]



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