ख़ुदा फिसल गए

शुऐब स्नान के बाद पाकवसाफ़ कपड़े पहन जूंही अपनी जन्नत से बाहर निकले….. हमारे फ़्रिश्ते भी अजीब हैं, अब इनकी जगह इंसानों को काम पे लगाना होगा। रात भर बारिश, घुटनों तक पानी। सुबह उठे तो फिर भी हलकी बारिश जारी। तैयार होकर बाहर निकले ही थे अपनी ही जन्नत... [पूरी पोस्ट]
writer शुऐब

खुदा से मिलो

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[12 Jun 2009 03:40 AM]

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