दिल का ये ज़ख्म है गहरा नहीं भरनेवाला.

डॉ.सुभाष भदौरिया.अहमदाबाद. ग़जल दिल का ये ज़ख्म है गहरा नहीं भरने वाला. तेरा शैदाई ये ज़ल्दी नहीं मरने वाला. अपनी सीरत भी वो देखे तो समझ जायेगा, आइना देख के हर रोज सँवरनेवाला. पास आये तो वो मौज़ो की रवानी समझे, दूर ही दूर से दरिया से गुज़रनेवाला. जान लेवा ये तपिश और तमन्ना उसक... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.सुभाष भदौरिया.
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[11 Jun 2009 22:45 PM]

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